hindi shayari

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वो दुश्मन बनकर मुझे जीतने निकले
दोस्ती कर लेते तो मैं ख़ुद ही हार जाता
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बड़ी अजीब है ये मोहब्बत 
वरना अभी उम्र ही क्या थी शायरी करने की
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काग़ज़ के बेजान परिंदे भी उड़ते हैं जनाव
बस डोर सही हाथ में होनी चाहिए
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बच्चों को पैर पर खड़ा करना था
पिता के घुटने इसी में जवाब दे गए
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल,कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा।//SPSONU
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इस कदर कंजूसी  पे आमादा है ससुराल मेरी
 राज़ कि बात बताते हुए डर लगता है 
ऐसे कमरे में सुला देते हैं साले मुझको
 पाओं फैलाऊँ तो दीवार पर सर लगता है
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कर गयी घर मेरा ख़ाली मेरे सो जाने के बाद
मुझको धड़का था कुछ होगा तेरे आने के बाद
मैंने दोनों बार थाने में लिखाई थी रपट 
एक तेरे आने से पहले एक तेरे जाने के बाद
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मैं जिस हाल में हूँ ए मेरे सनम रहने दे 
चाक़ू मत दे मेरे हाथों में बस कलम रहने दे
मैं तो शायर हूँ मेरा दिल है बहुत ही नाज़ुक 
मैं तो पटाखे से ही मर जाउँगा बम रहने दे
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दिल की कीमत आँकने वाला कोई ना था
रखे रखे अलमारी में टूट गया
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बसों में बिकती हुई शय खरीद मत लेना 
कहीं ये सोचते रह जाओ के ज़िन्दगी ना रही
बस एक बार सूरमा डाला था इन आँखों में 
उसके बाद चरागों में रौशनी ना रही
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