shayari

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पत्थरों तुम्हारी औकात ही क्या..उस ज़ालिम का "दिल" 
उफ़! तौबा
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इशक है ऐसी दवा ज़ख्मों को देती जो जन्म
वो भी कया र्ददे मुहब्बत जिसमे न हासिल मात हो

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सामान बाँध लिया है मैंने अपना अब बताओ,

कहाँ रहते हैं वो लोग जो कहीं के नहीं रहते

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और  उस  सुबह  सी  कोई  सुबह ना हुई ! 
ए  दोस्त !
जिस  सुबह  हमारी  नजरे  उनके  नूर  से  टकरा  गयी !
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चलते हुए हमारे खवाबो में दस्तक दे जाती है !
प्यारी सी कुछ हसीन पल दे जाती है !
उन पालो को समेट लेते हैं हम ताकि सपना टूटने के बाद भी दूर न जा सके !
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इस फ़िज़ा से  प्यार  ना  फरमाए  !!! ये  फ़िज़ा  बस  दो  पल  की  मेहमान  है  !!!ये  रहेगी  तेरे  बाद  भी !!! ये  रहेगी तेरे  बाद  भी !!! पर  तू  ये  मत  भूल  कम्बख्त  इश्क़े  जूनून  में  !!!की  !!तू  बस  एक  इंसान  है  !!तू  बस  एक  इंसान  है  .!!
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"वो ज़ुबान ही किया जिसमे रब का नाम न हो!
वो प्यार ही किया जिसमे ईमान न हो!
दिल तोह सबके पास है लेकिन वो दिल भी किया जिसमे किसीके लिए प्यार न हो!"  
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Wada na karo agar tum nibha na sako,Chaho na usko jise tum pa na sako,Dost to duniya me bahot hote hai,Par ek khas rakho jiske bina tum muskura na sako.SPSONU
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