09 October 2017 10:15:22 AM UTC
In: Shayari
तौबा
तौबा
पत्थरों तुम्हारी औकात ही क्या..उस ज़ालिम का "दिल" 
उफ़! तौबा
0 0 0 0 0 0 0
Like Like Like Like Like Like Like